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पच्चीस वर्ष पूर्व शुरू हुए दीवार पत्रिका आंदोलन को अब शिक्षाशास्त्रीय आधार पर औपचारिक मान्यता मिल गई है। डायट डीडीहाट द्वारा प्रकाशित शिक्षक संदर्शिका के विमोचन से इस नवाचार को राज्य स्तर पर एक शैक्षिक मॉडल के रूप में स्थापित कर दिया गया है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के चार प्रमुख कौशलों से जुड़ी दीवार पत्रिका
- अपर शिक्षा निदेशक कुमाऊं मंडल ने किया संदर्शिका का लोकार्पण
- बच्चों में रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने वाला अनोखा टूल
- राज्य स्तरीय सामाजिक विज्ञान महोत्सव में प्रदर्शनी ने खींचा ध्यान
- डायट डीडीहाट ने जारी की शिक्षक संदर्शिका, शिक्षा जगत में नवाचार को मिली नई पहचान
पिथौरागढ़ | दीवार पत्रिका, जिसे पच्चीस वर्ष पूर्व एक रचनात्मक शैक्षिक नवाचार के रूप में शुरू किया गया था, अब औपचारिक रूप से शिक्षाशास्त्रीय आधार प्राप्त कर चुकी है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) डीडीहाट, पिथौरागढ़ की पहल पर तैयार की गई शिक्षक संदर्शिका “दीवार पत्रिका : एक प्रक्रिया” का विमोचन प्रथम राज्य स्तरीय सामाजिक विज्ञान महोत्सव के दौरान डायट सभागार में अपर शिक्षा निदेशक कुमाऊं मंडल श्री शिव प्रसाद सेमवाल द्वारा किया गया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि यह संदर्शिका शिक्षकों के लिए एक व्यावहारिक टूल के रूप में साबित होगी।
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इसके माध्यम से शिक्षक अपने विद्यालयों में सरलता से दीवार पत्रिका तैयार करवा सकेंगे और इसे विभिन्न विषयों में ज्ञान निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ सकेंगे। उन्होंने “दीवार पत्रिका : एक अभियान” से जुड़े शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि दीवार पत्रिका को स्कूली पाठ्यक्रम से जोड़ना शिक्षा जगत की उल्लेखनीय उपलब्धि है। एससीईआरटी उत्तराखंड के सहायक शिक्षा निदेशक के.एन. बिजलवाण ने कहा कि दीवार पत्रिका नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा निर्धारित चार महत्वपूर्ण कौशल—आलोचनात्मक चिंतन, अभिव्यक्ति, रचनात्मकता और सामूहिकता—को विकसित करने में सक्षम है।
उन्होंने घोषणा की कि आगामी वर्षों में शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में दीवार पत्रिका को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक शिक्षक इस नवाचार से लाभान्वित हो सकें। डायट डीडीहाट के प्राचार्य श्री भाष्करानंद पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि दीवार पत्रिका केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि एक समग्र शिक्षण प्रक्रिया है। इसमें छात्र-छात्राएं स्वयं अपनी रचनाएँ लिखते, संपादित करते और मिलकर पत्रिका तैयार करते हैं। इस प्रक्रिया से न केवल भाषा विकास और रचनात्मकता बढ़ती है, बल्कि बच्चों में नेतृत्व, सहिष्णुता, आत्मविश्वास और समूह में कार्य करने की क्षमता भी विकसित होती है।
संदर्शिका के विमोचन कार्यक्रम में एससीईआरटी देहरादून के सामाजिक विज्ञान राज्य समन्वयक राकेश गैरोला, कनालीछीना के खंड शिक्षा अधिकारी हिमांशु कुमार नौगाई, संदर्शिका के संयोजक राजेश कुमार पाठक, डायट प्रवक्ता महेश चंद्र पुनेठा, चिंतामणि जोशी, रमेश चंद्र जोशी, तथा लेखक मंडल के सदस्य—दिलीप कुमार, हेम चंद्र भट्ट, दीप चंद और योगेश पांडे—उपस्थित रहे। उत्तराखंड के तेरह जिलों से आए शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को राज्य स्तरीय महोत्सव का महत्त्वपूर्ण आयोजन बना दिया। महोत्सव के दौरान दीवार पत्रिका प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्तियों और स्कूलों में किए गए नवाचारी कार्यों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।






