
देहरादून। उत्तराखंड में लोनी अर्बन मल्टी क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी (एलयूसीसी) द्वारा किए गए घोटाले ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। साल 2024 और 2025 के बीच प्रदेशभर में दर्ज एफआईआरों और पुलिस जांच से यह बड़ा खुलासा हुआ कि कंपनी ने गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों की लगभग 100 करोड़ रुपये की जमा-पूंजी ठग ली। इस घोटाले की सबसे दर्दनाक बात यह है कि जिनसे यह पैसा ठगा गया, वे ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर महिलाएं, गृहणियां और बेहद कम आय वाले परिवार थे, जिन्होंने वर्षों की बचत इस कंपनी में जमा की थी।
पुलिस मुख्यालय ने भी मामले की गंभीरता देखते हुए सभी प्राथमिकी की निगरानी की। धोखाधड़ी के साथ-साथ अनियमित जमा योजनाओं पर रोक लगाने वाले बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपोजिट स्कीम्स (BUDS Act) के तहत सभी मुकदमों को स्पेशल कोर्ट में भेजा गया। इसी बीच मार्च 2025 में ऋषिकेश निवासी एक व्यक्ति द्वारा हाईकोर्ट में पीआईएल दायर की गई और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग उठी। कुछ दिनों बाद एक और पीआईएल दायर होने पर हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई करते हुए 17 सितंबर 2025 को मामले की सीबीआई जांच के आदेश जारी किए।
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घोटाले के खुलासे के बाद राज्यभर में आंदोलन तेज हो गया। सैकड़ों महिलाओं और पीड़ित परिवारों ने मार्च 2025 से ही कोर्ट परिसर में प्रदर्शन शुरू कर दिए थे। मामला आगे बढ़ते-बढ़ते सितंबर 2025 में इतना गंभीर हो गया कि पीड़ितों ने सड़कों पर उतरकर राजभवन कूच तक किया और ठगों को कड़ी सजा तथा जमा रकम वापस करने की मांग की।
सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में 46 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें कंपनी का मालिक समीर अग्रवाल, चेयरमैन दिनेश सिंह, कई राज्यों में तैनात ब्रांच मैनेजर, एजेंट, सहयोगी, और यहां तक कि ब्रांड एम्बेसडर रहे अभिनेता श्रेयस तलपड़े और आलोक नाथ तक शामिल हैं। इन सभी पर लोगों को गुमराह कर जमा योजनाओं में निवेश करवाने, धोखाधड़ी करने और अवैधानिक वित्तीय गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं।
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कंपनी उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी सक्रिय थी। यूपी के बाराबंकी, जालौन, लखीमपुर खीरी, बलरामपुर, ऊना से लेकर देहरादून, ऋषिकेश, कोटद्वार, श्रीनगर और पिथौरागढ़ तक इसके कई नेटवर्क फैले थे। पुलिस की जांच में पाया गया कि कंपनी ने अलग-अलग राज्यों में कम आय वाले लोगों को सदस्य बनाकर उनकी बचत राशि को उच्च ब्याज या विशेष लाभों के झांसे में फंसाकर जमा कराया और फिर कंपनी अचानक बंद कर दी।
इस पूरे प्रकरण में देवप्रयाग, घनसाली, कोटद्वार, पौड़ी, श्रीनगर, ऋषिकेश, देहरादून के पटेलनगर, उत्तरकाशी, चंबा और नई टिहरी थानों में कुल 10 एफआईआर दर्ज की गई थीं। सभी मामलों में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं और अब सीबीआई द्वारा विस्तृत जांच आगे बढ़ रही है।
घोटाले का यह बहुस्तरीय जाल न केवल राज्य के वित्तीय ढांचे को चुनौती देता है, बल्कि यह बताता है कि असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाली गरीब महिलाओं और परिवारों की बचत कितनी आसानी से ठगी का निशाना बन सकती है। पीड़ित परिवार अब सीबीआई से उम्मीद लगाए हैं कि उनकी मेहनत की कमाई किसी न किसी रूप में वापस मिल सके और दोषियों को कड़ी सजा मिले।





