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स्त्री के बीच माँग मेँ सिन्दूर भरा है उसके पति की आयु लम्बी होती है। रामायण मेँ प्रसंग के अनुसार जब बालि और सुग्रीव के बीच युध्द में श्रीरामने बालि को नही मारा था। बालि के हाथो मार खाकर सुग्रीव श्रीरामके पास पहुचा तब श्रीरामने कहा की तुम्हारी और बालि की शक्ल एक होने के कारण मैँ भ्रमित हो गया था। #सत्येन्द्र कुमार पाठक
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सनातन धर्म की संस्कृति में सिंदूर का महत्वपूर्ण उल्लेख किया गया है । सभी युगों में सिंदूर सतीत्व और शालीनता का प्रतीक माना गया है। पत्नी के माँगके बीचो बीच सिन्दूर लगा कर रहती है उसके पति की अकाल मृत्यू नही होती है।
स्त्री अपने माँगके सिन्दूर को बालो से छिपा लेती है उसका पति समाज मेँ विमुख हो जाता है। स्त्री बीच माँग मेँ सिन्दूर न लगाकर किनारे की तरफ सिन्दूर लगाती है उसका पति उससे किनारा कर लेता है।
स्त्री के बीच माँग मेँ सिन्दूर भरा है उसके पति की आयु लम्बी होती है। रामायण मेँ प्रसंग के अनुसार जब बालि और सुग्रीव के बीच युध्द में श्रीरामने बालि को नही मारा था। बालि के हाथो मार खाकर सुग्रीव श्रीरामके पास पहुचा तब श्रीरामने कहा की तुम्हारी और बालि की शक्ल एक होने के कारण मैँ भ्रमित हो गया था। भगवान श्रीराम ने देख लिया कि बालि की पत्नी तारा का माँग सिन्दूरसे भरा हुआ है। भगवान राम ने सिन्दूरका सम्मान करते हुये बालि को नही मारा था।
सुग्रीव ने बालिको ललकारा तब तारा स्नान कर रही थी उसी समय भगवानने देखा की मौका देखकर और बाण छोड देने के कारण बाली मारा गया था । सिंदूर की महत्ता गणपति , माता सीता और हनुमान जी एवं देवियों के लिए महत्वपूर्ण है । सधवा स्त्री की मांग में सिंदूर रहने से सुख समृद्धि , वैभव , पति की अकाल मृत्यु से बचाती और पति की लंबी आयु की वृद्धि होती है।








