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इस निर्माण कार्य में सीबीआरआई के साथ सूर्य के पथ को लेकर तकनीकी मदद बेंगलूरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए) की भी ली गई है। बेंगलूरु की एक कंपनी ऑप्टिका ने लेंस और ब्रास ट्यूब का निर्माण किया है।
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देहरादून। उत्तराखंड में रामजन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्नी के साथ सीएम आवाज आवास पर कन्या पूजन किया। साथ ही उन्होंने पूरे प्रदेशवासियों को रामनवमी की शुभकामनाएं दीं। वहीं प्रदेश में विभिन्न जगहों पर रामनवमी के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मंदिरों में भी सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा है।
आज देशभर में रामनवमी मनाई जा रही है। इस बार रामनवमी बहुत ही खास रही। अयोध्या में राम मंदिर बनने और प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार रामनवमी मनाई गई। दोपहर 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक हुई जो सभी के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
अयोध्या में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली रामनवमी पर सूर्यदेव ने अपनी किरणों से रामलला के मस्तक पर तिलक किया। और इस अद्भुत क्षण को देखने के लिए लोग उत्सुक रहे। रामलला के जन्मोत्सव के मौके पर मंदिरों में विधि-विधान के साथ भगवान राम की पूजा की गई और मंगल गीत और भजन गाया गया।
सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) रुड़की के वैज्ञानिकों की एक टीम ने सूर्य तिलक मैकेनिज्म को तैयार किया है। इसके डिजाइन को तैयार करने में टीम को पूरे दो साल लग गए थे। 2021 में राम मंदिर के डिजाइन पर काम शुरू हुआ था। सीबीआरआई के वैज्ञानिकों की एक टीम ने सूर्य तिलक मैकेनिज्म को इस तरह से डिजाइन किया है कि हर साल राम नवमी के दिन दोपहर 12 बजे करीब चार मिनट तक सूर्य की किरणें भगवान राम की प्रतिमा के माथे पर पड़ें।
इस निर्माण कार्य में सीबीआरआई के साथ सूर्य के पथ को लेकर तकनीकी मदद बेंगलूरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए) की भी ली गई है। बेंगलूरु की एक कंपनी ऑप्टिका ने लेंस और ब्रास ट्यूब का निर्माण किया है।





