आगरा – आगरा में एक सनसनीखेज घटना ने पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है। साइबर ठगी के आरोपी संकेत यादव, जो महिला पुलिस अधिकारी की आवाज निकालने की कला और चालाकी के लिए कुख्यात है, शनिवार रात पुलिस और बंदी रक्षकों को चकमा देकर फरार हो गया। आरोपी ने पेट दर्द का बहाना बनाकर खुद को अस्पताल में भर्ती कराया और वहां बंदी रक्षकों के सो जाने के दौरान हथकड़ी निकालकर चुपचाप भाग खड़ा हुआ।
जानकारी के मुताबिक, संकेत यादव मूल रूप से जबलपुर (मध्य प्रदेश) का निवासी है। वह साइबर क्राइम के एक गंभीर मामले में गिरफ्तार होकर कासगंज जेल में बंद था। शुक्रवार शाम पेट दर्द की शिकायत करने पर उसे एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में भर्ती किया गया। उसकी देखरेख के लिए बंदीरक्षक अजीत पांडे और जयंत कुमार को जिम्मेदारी दी गई थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, देर रात दोनों बंदीरक्षक गहरी नींद में सो गए। इसी का फायदा उठाकर संकेत यादव ने अपने हाथों की हथकड़ी किसी तरह खोल दी और वार्ड से निकलकर अस्पताल के मुख्य गेट तक पहुंच गया। यहां से वह तेज़ कदमों से भागता हुआ सीसीटीवी कैमरों में कैद हुआ।
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सीसीटीवी फुटेज में वह मोती कटरा क्षेत्र की ओर जाता दिखा, फिर महादेव गली होते हुए नाला कंशखार और नाला चून पचान की दिशा में गया। इसके बाद वह स्मार्ट सिटी के कैमरों की निगाह से ओझल हो गया। पुलिस को आशंका है कि वह गलियों के रास्ते एमजी रोड पहुंचा और किसी वाहन में सवार होकर शहर से बाहर निकल गया।
घटना के बाद थाना एमएम गेट पुलिस, साइबर सेल और स्पेशल ऑप्स टीम सहित कई पुलिस टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं। पुलिस ने उसके जबलपुर स्थित पैतृक गांव में दबिश दी, लेकिन वह वहां नहीं पहुंचा। ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, उसकी मां चाय का खोखा चलाती हैं और पिता दिव्यांग हैं। परिवार ने भी उसके ठिकाने के बारे में अनभिज्ञता जताई है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग से इस तरह का फरार होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बंदी रक्षकों की लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई है। मामले में पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए बंदी रक्षकों से पूछताछ शुरू कर दी है।
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि आरोपी की तलाश के लिए शहर से बाहर भी टीमों को रवाना किया गया है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है। साथ ही, उसकी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
इस घटना ने न केवल पुलिस की सुरक्षा व्यवस्थाओं में खामियों को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि साइबर अपराधी किस तरह अपने चालाक दिमाग का इस्तेमाल करके कानून की पकड़ से बच निकलते हैं। अब यह देखना होगा कि पुलिस कितनी जल्दी इस फरार आरोपी को पकड़कर कानून के कटघरे में खड़ा कर पाती है।







