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सुकून तन मन में छाने लगा सुबह सूरज सबको खुश देखकर मुस्कुराने लगा इसी बीच तुमने किसी दिन कहा चलो बिकिनी पहनकर स्विमिंग पूल में नहाएं गर्मियों के दिन घर से बाहर इस अजनबी शहर में किसी तरह बिताएं. #राजीव कुमार झा
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पहले प्यार के दिन
तब लोगों की नजर से
बचना
कभी किसी शहर में
जाकर
साथ रहना
थोड़े निकट आकर
एक दूसरे को
मन के भीतर की
बात कहना
धीरे धीरे खत्म होती
चली गई
हमारी उदासी
सुकून तन मन में
छाने लगा
सुबह सूरज
सबको खुश देखकर
मुस्कुराने लगा
इसी बीच तुमने
किसी दिन कहा
चलो बिकिनी पहनकर
स्विमिंग पूल में नहाएं
गर्मियों के दिन
घर से बाहर
इस अजनबी शहर में
किसी तरह बिताएं








