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कविता : इंसान की भूल… करो जतन निकलो अपने मकान से ना निकालो सुन बात दूसरे कान से आने वाले समय की चेतावनी दे गए पेड़ लगाओ अगर जीना सम्मान से, #जारा महेश राठौर सोनू, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
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शायद बड़ी भूल हो गई इंसान से
ठंडी हवा खरीदे बेचारा दुकान से
ए सी , कूलर सब जवाब दे गए
आग बरस रही देखो आसमान से
लगता है हाथ धो बैठेंगे जान से
धधक रही धरती तेज तापमान से
पेड़ पौधे सबके सब जवाब दे गए
आग बरस रही देखो आसमान से
करो जतन निकलो अपने मकान से
ना निकालो सुन बात दूसरे कान से
आने वाले समय की चेतावनी दे गए
पेड़ लगाओ अगर जीना सम्मान से,,
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