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आजादी के 75 वर्षों के बावजूद आरक्षण को जारी रखकर राजनीति का खेल खेलना उचित नहीं है। अगर आरक्षण का लाभ कमजोर वर्गो को सही मायने मे देना ही है तो फिर हर जाति के कमजोर परिवार को दिया जाये तभी मजबूत लोकतंत्र की स्थापना होगी। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर (राजस्थान)
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भारत को आजाद हुए इतने वर्षों के बावजूद भी देश में आरक्षण की बीमारी अभी भी जारी है। राजनैतिक दलों ने इसे वोट बैंक का जरिया बना लिया है। आज कायस्थ समाज और ब्राह्मण समाज सहित कुछ जातियों को छोड कर हर कोई जाति वाला आरक्षण का लाभ ले रहा है। भले ही वे कितने भी साधन सम्पन्न क्यों न हो गये हो। उनके पास बंगले, गाडियां, नोकर चाकर, अपार धन सम्पदा होने के बाद भी आरक्षण का लाभ उठा रहे है।
वही दूसरी ओर आरक्षण के लाभ से वंचित जातियां आज भी आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अपने बच्चों को उच्च शिक्षा, पौष्टिक आहार, भोजन भी समय पर नहीं करा पा रहे हैं। क्या स्वर्ण जाति में जन्म लेना पाप हैं। अतः आरक्षण की बीमारी को पूरी तरह से समाप्त किया जाये और योग्यता के बलबूते पर बच्चों को उच्च शिक्षा में प्रवेश दिया जाये और सरकारी नौकरियों में नियुक्ति दी जाये।
आरक्षण को लेकर बार बार विवाद इसलिए पैदा होते हैं चूंकि हर राजनीतिक पार्टी वोटों के खातिर गंदी राजनीति का खेल खेल रही हैं और आरक्षण को समाप्त करने के बजाय आरक्षण की बैसाखी के सहारे आज की युवा पीढ़ी को पंगु बनाती जा रही है और स्वर्ण जाति के युवाओं की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही हैं।
आजादी के 75 वर्षों के बावजूद आरक्षण को जारी रखकर राजनीति का खेल खेलना उचित नहीं है। अगर आरक्षण का लाभ कमजोर वर्गो को सही मायने मे देना ही है तो फिर हर जाति के कमजोर परिवार को दिया जाये तभी मजबूत लोकतंत्र की स्थापना होगी।







