
रिचार्ज… श्रेष्ठ साहित्य सृजन हेतु निरंतर गहन चिंतन मनन का होना नितांत आवश्यक है। लेखन का कार्य कोई खेल नहीं है अपितु समाज में सुधार लाने की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और लेखक आज इस जिम्मेदारी को बखूबी तरीके से निभा रहे हैं… #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर, राजस्थान
[/box]
एक कलमकार अपनी लेखनी के माध्यम से श्रेष्ठ साहित्य का सृजन कर जन जन को रिचार्ज करता हैं। जन जन में सोचने-समझने व चिंतन मनन की शक्ति को जागृत करता हैं जो एक तरह से इंसान को रिचार्ज करने का ही श्रेष्ठ कर्म हैं। यही कलमकार का मुख्य उद्देश्य हैं। अगर आपके पास जरूरत से अधिक धन हैं तो आप धनवान कहलायेंगे।
Government Advertisement
अगर आप में साहित्य पढने की चाह हैं तो आपका जीवन स्वर्णिम और स्वर्ग मय बन जाता है। साहित्य सृजन के लिए लेखक अपना पसीना बहाता हैं । साहित्य सृजन कोई सरल कार्य नहीं है । इसके लिए दिन रात चिंतन मनन करना पडता हैं । इसलिए पाठकों को चाहिए कि वे अधिक से अधिक साहित्य पढ कर उस रचना पर अपने कमेंट्स ज़रूर दें। ताकि रचनाकार का श्रम सफल हो सकें।
श्रेष्ठ साहित्य सृजन रचनाकार का एक अनुष्ठान हैं। वो तभी सफल हो पाता है जब पाठक उसकी रचना को अधिक से अधिक पढे और पढने की आदत विकसित करें । रचनाकार की लेखनी मां सरस्वती के आशीर्वाद से ही आगे बढती हैं और शब्द से शब्द जुडते जाते हैं और लेखन रूपी कडी आगे से आगे स्वत : ही चलती रहती हैं। साहित्य पढने से अगर किसी के जीवन में रचनात्मक बदलाव आता है तभी लेखक का लेखन सार्थक सिद्ध होता हैं।
सूचना विभाग में चल रही कारगुजारियों से संबंधित समाचार
- क्लिक करें- सूचना विभाग : पारदर्शिता का खोखला ढांचा और आरटीआई की अनदेखी
- क्लिक करें- डीजी बंशीधर तिवारी के कार्यकाल में बढ़ी अपारदर्शिता की शिकायतें
- क्लिक करें- सितम्बर 2022 : सूचना विभाग सवालों के घेरे में
- क्लिक करें- RTI : 12 रूपये लेकर भी कागजों में गुमराह कर रहा है सूचना विभाग
- क्लिक करें- सीएम पोर्टल बना अफसरों का आरामगाह
मन साफ हो और सकारात्मक सोच हो तो तभी मन रूपी मंदिर में श्रेष्ठ विचारों का आगमन होता है। जैसे हम क्रीम पाउडर लगा कर व अच्छे सुंदर कपडे पहन कर सुन्दर दिखना चाहते हैं, ठीक उसी प्रकार एक रचनाकार अच्छे शब्दों का प्रयोग करके अपनी रचना को जन जन तक पहुंचाने का कार्य निरंतर करता रहता हैं और लेखन का कार्य जितना आसान दिखता है उतना आसान है नहीं।
चूंकि श्रेष्ठ साहित्य सृजन हेतु निरंतर गहन चिंतन मनन का होना नितांत आवश्यक है। लेखन का कार्य कोई खेल नहीं है अपितु समाज में सुधार लाने की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और लेखक आज इस जिम्मेदारी को बखूबी तरीके से निभा रहे हैं जो वंदनीय और सराहनीय है।
https://devbhoomisamachaar.com/archives/41525








