
सुनील कुमार माथुर, जोधपुर (राजस्थान)
जीवन में हर वक्त एक सी परिस्थिति नहीं होती हैं। हर क्षण परिस्थिति बदलती रहती है लेकिन हम कभी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। जीवन में कभी खुशी तो कभी गम चलता ही रहता है। खुशी के क्षणों में हम इतने खुश हो जाते हैं कि दूसरी सारी बातों को भूल जाते हैं और जमकर खुशियों का आनंद उठाते हैं। लेकिन जब गम या दुःख आता हैं तो हम हताश व निराश हो जाते हैं व कभी कभी ईश्वर को भी कोसने लगते है कि हम तेरी कितनी पूजा आराधना करते हैं फिर भी दुःख देने के लिए तुम्हें हम ही दिखें। हम परमात्मा को बुरा भला कह कर अपने मन को जरुर कुछ देर के लिए हल्का कर लेते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि खुशी के क्षणों में अधिक हंसे नहीं और गम में अधिक रोए नहीं। अपितु हर परिस्थिति में समान रूप से रहना चाहिए तभी आप गम की स्थिति में अधिक दुःख महसूस नहीं कर पायेंगे व सामान्य स्थिति में बनें रह सकते हैं.
देना ही हैं तो आशीर्वाद दीजिए : बड़े बुजुर्ग को चाहिए कि वे बच्चों को आदर्श संस्कारों के साथ ही साथ हर वक्त अपना आशीर्वाद दें। वहीं बच्चों को भी चाहिए कि वे बड़े बुजुर्गो का आदर, मान सम्मान करें, उनकी आज्ञाओं का समय पर पालन करें। उनके पास बैठे और उनके जीवन के अनुभवों को सुनें और उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करें। बड़े बुजुर्गों को भी चाहिए कि वे अगर अपने बच्चों को धन दौलत नहीं दे सकते तो कोई बात नहीं, लेकिन आशीर्वाद तो जरूर दे सकते हैं। चूंकि यह जरूरी नहीं है कि हर माता-पिता धनवान हो, लेकिन उनके पास आशीर्वाद देने की झोली जरुर भरी रहती हैं। इसलिए बच्चों को भी चाहिए कि वे कोई ऐसा काम न करे कि जिससे माता-पिता व हमारे बडे बुजुर्गों को शर्मिन्दा होना पड़े और वे हमें आशीर्वाद के स्थान पर बद् दुआ दें।
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सवालों की बारिश : बच्चों के साथ पूछताछ के नाम पर सवालों की बारिश न करें। बच्चों से प्रेम और स्नेह के साथ बातचीत करते हुए पूछताछ कीजिए ताकि वह भयभीत न हो। जो भी पूछना हो वह एक एक करके पूछे। सवालों की बौछार करने से बच्चों में तनाव पैदा हो जाता है और तनाव में वह या तो कोई गलत कदम उठा लेता हैं या झूठ का सहारा लेकर वह एक के बाद एक झूठ बोलता ही जाता है और फिर यह झूठ उसके जीवन में एक आदत का रूप ले लेती है जो न्याय संगत नहीं है।
विश्वास की दीवार : विश्वास की दीवार इतनी मजबूत होनी चाहिए कि उसे शंका की मार भी न तोड़ सकें। वर्तमान समय में किसी का विश्वास हासिल करना भी एक बहुत बड़ी बात है। जब भाई भाई पर, पिता पुत्र पर विश्वास नहीं करते हैं ऐसे में किसी तीसरे व्यक्ति पर विश्वास करना बहुत ही बड़ी बात है। इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। विश्वास ही वह एकमात्र जरिया है जो पराये को भी आसानी से अपना बना लेता हैं। इसलिए विश्वास को सदैव बनाये रखें। जहां विश्वास है वहीं अपनापन हैं।
चुनौतियां : कहते हैं कि लक्ष्मी कभी भी अकेली नहीं आती हैं अपितु वह अपने साथ कई चुनौतियां लेकर आती हैं इसलिए धन दौलत पाकर इंसान को कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए। अपितु हर परिस्थिति में समान रूप से रहना चाहिए। धन दौलत और उच्च पद प्राप्त करने के बाद इंसान को काफी घमंड आ जाता है और फिर वह किसी को भी कुछ नहीं समझता हैं वह अंहकार के नशे में इतना डूब जाता है कि फिर यह धन दौलत उसे गलत राह की ओर ले जाती हैं। अगर वह गलत रास्ते नहीं जाता हैं तो उसकी औलाद उस धन को गलत तरीके के कार्यों में लगा देता हैं और बदनामी का रास्ता खोल देता हैं। अतः जीवन में ईमानदारी से कार्य करें और जितना भी मिलें उसमें संतोष कीजिए। संतोष से बड़ा कोई धन नहीं है।
कभी नहीं भूल सकता : कहते हैं कि मधु मक्खी शहद बनाना भूल सकती हैं लेकिन एक कलमकार अपनी सकारात्मक व रचनात्मक कलम चलाना कभी नहीं भूल सकता। सच्चा कलमकार वहीं हैं जो समाज में जैसा देखता हैं, वैसा ही लिखता हैं। चूंकि कलमकार समाज को उसका आयना दिखाता हैं। वह किसी के खिलाफ नहीं लिखता हैं और न ही किसी को अपमानित करने का कार्य करता हैं, अपितु वह सत्य को उजागर करने का कार्य करता हैं। उसकी सोच सदैव समाज उत्थान की होती हैं और यहीं वजह है कि वह समाज में व्याप्त गंदगी को दूर करने के लिए राष्ट्र के सजग प्रहरी के रूप में कार्य करता है। जो वंदनीय है और सराहनीय भी। बस आपकी सोच कैसी हैं। अच्छा व बुरा उसी पर निर्भर करता है।







