
देहरादून: उत्तराखंड की हालिया भीषण आपदा ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है। इस मुश्किल घड़ी में जमीअत उलेमा-ए-हिंद उत्तराखंड ने राहत और मानवता की मिसाल पेश करते हुए प्रभावित लोगों की हर संभव मदद की है। प्रतिदिन 1,200 से अधिक लोगों को भोजन मुहैया कराया जा रहा है, जबकि जरूरतमंद परिवारों को राशन किट और आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। मंगलवार को जमीअत ने सहस्त्रधारा के कार्लीगाड और मझाड़ा गांवों में 70 परिवारों तथा एमडीडीए कॉलोनी में 200 परिवारों को राशन किट वितरित की।
राशन वितरण में स्थानीय प्रधान राकेश के सहयोग से खाद्य सामग्री, दाल, चावल, आटा, तेल और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचाई गईं। एमडीडीए कॉलोनी में यह कार्य क़ाज़ी दारूल कज़ा मुफ्ति सलीम अहमद कासमी की देख-रेख में संपन्न हुआ। जमीअत उलेमा-ए-हिंद उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना हुसैन अहमद क़ासमी ने प्रभावित इलाकों—सेरा गांव, कार्लीगाड, मझाड़ा और एमडीडीए कॉलोनी का दौरा किया। उन्होंने वहां के हालात का जायज़ा लिया और प्रभावितों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को समझा।
इस अवसर पर देहरादून के जिला अध्यक्ष मौलाना अब्दुल मन्नान क़ासमी, जिला उपाध्यक्ष मौलाना रागिब मजाहिरी, शहर सदर मौलाना अयाज़़ अहमद, मुफ्ती नदीम क़ासमी, जिला कोषाध्यक्ष मास्टर अब्दुल सत्तार और अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। मौहलाना हुसैन अहमद ने कहा, “आपदा चाहे कितनी भी भयंकर क्यों न हो, हमें हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। जमीअत का उद्देश्य केवल राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि इंसानियत और सामाजिक एकता का संदेश फैलाना है।”
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जमीअत के प्रदेश महा सचिव मौलाना शराफत अली क़ासमी ने परवल में मृतक फरमान के परिजनों को 50,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी। एमडीडीए कॉलोनी में बिट्टू, इंद्रसेन, जफर और आसिफ के मकान पूरी तरह से ढह गए थे। जमीअत ने इन परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की और फरमान के बच्चों की शिक्षा का खर्च भी उठाने की जिम्मेदारी ली। मौलाना शराफत अली ने कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम प्रभावित परिवारों को केवल आज के लिए नहीं, बल्कि उनके भविष्य के लिए भी सहयोग दें। बच्चों की शिक्षा का जिम्मा उठाना इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।”
16 सितंबर से जमीअत उत्तराखंड प्रतिदिन 1,200 लोगों को भोजन उपलब्ध करा रही है। इसके तहत प्रभावित इलाकों में खाना वितरित करना और जरूरतमंदों तक ताजगी भरा भोजन पहुंचाना शामिल है। यह सेवा केवल आपदा राहत नहीं, बल्कि समाज में इंसानियत का संदेश भी फैला रही है। जमीअत क़ासमी की यह पहल समाज में सेवा, मानवता और समाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत करती है। उनका यह कार्य न केवल प्रभावित परिवारों के लिए राहतकारी है, बल्कि समाज में एक संदेश भी भेजता है कि विपरीत परिस्थितियों में सहयोग और इंसानियत सबसे बड़ा संबल है।
मौलाना हुसैन अहमद ने सभी सामाजिक और धार्मिक संगठनों से अपील की है कि वे भी आपदा प्रभावितों के लिए आगे आएं और सहयोग प्रदान करें।





