
थाईलैंड में बैठे साइबर ठगों ने लखनऊ के एक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 54.60 लाख रुपये की ठगी की। साइबर क्राइम पुलिस ने म्यूल खातों के जरिये रकम ट्रांसफर कराने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
- एनआईए-एटीएस बनकर बुजुर्ग को सात दिन रखा डिजिटल अरेस्ट
- म्यूल खातों से क्रिप्टो करेंसी में विदेश भेजी गई ठगी की रकम
- साइबर क्राइम पुलिस ने चार आरोपियों को दबोचा
- 12 सदस्यीय गिरोह का नेटवर्क यूपी से थाईलैंड तक फैला
लखनऊ। थाईलैंड में बैठे साइबर जालसाजों के एक गिरोह ने लखनऊ के गोमतीनगर निवासी वरिष्ठ नागरिक राजेंद्र प्रकाश वर्मा को डिजिटल अरेस्ट कर 54.60 लाख रुपये ठग लिए। मामले का खुलासा करते हुए साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने मंगलवार को गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि गिरोह का सरगना अभी विदेश में फरार है। डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि 13 दिसंबर को जालसाजों ने खुद को एनआईए और एटीएस अधिकारी बताकर राजेंद्र प्रकाश से संपर्क किया।
आतंकियों को फंडिंग करने का झूठा आरोप लगाते हुए उन्हें भयभीत किया गया और जांच के नाम पर सात दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। इस दौरान आरोपियों ने पीड़ित से इंडसइंड बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के दो खातों में कुल 54.60 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम म्यूल खातों में मंगवाई गई और वहां से निकालकर क्रिप्टो करेंसी के जरिये थाईलैंड में बैठे सरगना को भेज दी गई।
सर्विलांस और बैंक डिटेल के आधार पर साइबर क्राइम टीम ने वजीरगंज निवासी मो. सुफियान, दुबग्गा निवासी मो. आजम, गुडंबा निवासी आरिफ इकबाल और मदेयगंज निवासी उजैर खान को गिरफ्तार किया। डीसीपी के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी करने वाले इस गिरोह में करीब 12 लोग शामिल हैं। कुछ आरोपी बहराइच और श्रावस्ती के रहने वाले हैं, जिनकी तलाश जारी है। म्यूल खाताधारकों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 5 मोबाइल फोन, ₹25,234 नकद, 5 डेबिट कार्ड, 1 पैन कार्ड, 1 आधार कार्ड बरामद किए हैं।
म्यूल खाता वह बैंक खाता होता है, जिसे साइबर ठग कमजोर या कम पढ़े-लिखे लोगों के नाम पर खुलवाकर इस्तेमाल करते हैं। खाताधारक को थोड़े रुपये देकर उसका एटीएम, पासबुक और चेकबुक अपने पास रख लेते हैं और उसी खाते से ठगी की रकम का लेन-देन करते हैं।








