
बांग्लादेश के जेस्सोर जिले में राणा प्रताप बैरागी नामक हिंदू व्यक्ति की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- बांग्लादेश में पांचवीं बार हिंदू समुदाय पर घातक हमला
- कोपलिया बाजार में दिनदहाड़े मारी गई गोली, फैली दहशत
- दीपू चंद्र दास के बाद एक और हिंदू की हत्या से बढ़ी चिंता
- धारदार हथियार और आग से हत्या के मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार
ढाका/जेस्सोर। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार को जेस्सोर जिले के कोपलिया बाजार में एक और हिंदू नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान राणा प्रताप बैरागी के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर करीब 12 बजे कुछ अज्ञात बदमाशों ने उन्हें निशाना बनाते हुए गोलियां चलाईं, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब हाल ही में कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश के कई हिस्सों में अशांति का माहौल बना हुआ है। इसी क्रम में यह पांचवीं ऐसी घटना बताई जा रही है, जिसमें किसी हिंदू व्यक्ति की हत्या की गई है। लगातार हो रही हत्याओं ने न केवल बांग्लादेश बल्कि भारत समेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। कुछ ही सप्ताह पहले दीपू चंद्र दास समेत अन्य हिंदुओं की हिंसक मौतों ने अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए थे।
राणा प्रताप बैरागी की हत्या को भी केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि देश में बढ़ती अल्पसंख्यक असुरक्षा के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले रविवार को एक अन्य मामले में बांग्लादेशी पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। यह मामला ढाका से लगभग 100 किलोमीटर दूर शरीयतपुर जिले का है, जहां बुधवार रात खोकन चंद्र दास (50) पर धारदार हथियारों से हमला किया गया था। हमलावरों ने न केवल उनकी बेरहमी से पिटाई की, बल्कि सिर पर पेट्रोल डालकर आग भी लगा दी।
गंभीर रूप से घायल दास ने शनिवार को दम तोड़ दिया। इस मामले में रैपिड एक्शन टीम ने रविवार सुबह ढाका से लगभग 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित किशोरगंज से तीन आरोपियों—सोहाग खान, रब्बी मोल्या और पलाश सरदार—को गिरफ्तार किया। बताया गया कि खोकन चंद्र दास दवा की दुकान और मोबाइल बैंकिंग का कारोबार करते थे और ऑटो-रिक्शा से यात्रा कर रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक समूहों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।








