
सुनील कुमार माथुर
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार, जोधपुर (राजस्थान)
वर्तमान समय में संयुक्त परिवार अब कम ही देखने को मिलते हैं, जबकि एकांत में रहने वाले छोटे परिवारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।इस परिवर्तन के कारण जमीनों की कीमतें और किराये के मकानों का किराया दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।यह सब कुछ संयुक्त परिवारों के टूटने का ही प्रत्यक्ष परिणाम है।न जाने आने वाला समय हमें कहां ले जाएगा। खुशहाल जीवन व्यतीत करने के लिए केवल पैसा ही सब कुछ नहीं होता।उसके लिए परिवार के बीच प्यार और समझदारी का होना अत्यंत आवश्यक है।
चाहे परिवार छोटा हो या बड़ा, सभी में प्यार, स्नेह, धैर्य, सहनशीलता, नम्रता, विनम्रता और आपसी समझ जैसे गुण अनिवार्य रूप से होने चाहिए।जहां परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव, शंका या अहंकार होता है, वहां बिखराव और अशांति का वातावरण पनपता है।इसलिए परिवार में शांति बनी रहनी चाहिए, क्योंकि जहां शांति होती है, वहीं लक्ष्मी जी का भी वास होता है। आज समूचे विश्व में जो अशांति का दौर चल रहा है, वह अंततः मानवता के लिए घातक सिद्ध होगा।
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मारपीट और खून-खराबे से किसी का भला नहीं होता, बल्कि यह तो विकास की राह में रुकावट ही पैदा करता है।हथियारों की होड़ केवल विनाश का कारण बनती है।मनुष्य स्वयं ही अपने जीवन का निर्माण और विनाश तय कर रहा है। समझदारी इसी में है कि हम अपने बुद्धि और विवेक को राष्ट्र के उत्थान और समाज के कल्याण में लगाएं।हर नई सुबह अपने साथ सुख, शांति और समृद्धि लेकर आती है।इसलिए प्रेम और विश्वास के साथ जीवन जीना चाहिए।
प्रायः यह देखा गया है कि आप किसी के लिए चाहे कितना भी कुछ क्यों न कर लें, लेकिन लोग वही बात याद रखते हैं जो आप उनके लिए नहीं कर पाए।क्योंकि यह दुनिया आज मतलब की दुनिया बनती जा रही है। अतः अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए प्रेम, शांति और समझदारी से भरपूर जीवन दृष्टिकोण अपनाइए—यही सच्ची प्रगति और संतुलित जीवन का आधार है।







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