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आज देश की राजनीति इतनी गंदी हो गई है कि पाठ्यक्रमों से हमारे देश भक्तों, महान स्वतंत्रता सेनानियों , महापुरुषों और जानें मानें कवि कवित्रियों के पाठ तक पाठ्यक्रमों से हटा दिए। ऐसे में युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना व श्रेष्ठ साहित्य सृजन की भावना का विकास कैसे हो पायेगा। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर, राजस्थान
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कल्पना करना कोई बुरी बात नही है़, लेकिन आज का इंसान इस मशीनरी युग में दिन भर कल्पनाओं में ही डूबा रहता हैं। हर रोज नयी नयी कल्पनाएं करता हैं और अनेक पूल बांधता है और फिर उन्हें धराशाही कर देता हैं। लेकिन वह वास्तविकता को नजर अंदाज कर रहा हैं। चूंकि वास्तविकता कड़वी होती हैं पर उसे छोडा नहीं जा सकता। केवल कल्पनाओं की ऊंची उड़ान भरने से कोई फायदा नहीं होता जब तक हम उसे साकार नहीं कर लेते।
जीवन जीना भी एक कला है। इसलिए जीवन में तीन चीजें हमेंशा ध्यान में रखनी चाहिए। सच्चाई, कर्तव्य और मृत्यु। जो इंसान सच्चाई की राह चलता है उसे सफलता अवश्य ही प्राप्त होती है हां यह बात अलग है कि सच्चाई के मार्ग पर चलने वालों को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में कुछ कठिनाइयां आ सकती है लेकिन वह लक्ष्य को प्राप्त करने के साथ ही साथ अनेक अनुभवों को भी प्राप्त करता हैं।
हमें न तो अपने आप पर घमंड करना चाहिए और न ही अपने कार्यो पर घमंड करना चाहिए अपितु आप से जितना हो सकें उतनी जनता जनार्दन की मदद अवश्य ही कीजिए। किसी ने बहुत खूब कहा है कि जिस शरीर के साथ हम पैदा हुए हैं उसके जिम्मेदार हम नहीं है परन्तु जिस चरित्र और किरदार के साथ हम विदा होगें उसके पूरे जिम्मेदार हम स्वयं होंगें।
आज देश की राजनीति इतनी गंदी हो गई है कि पाठ्यक्रमों से हमारे देश भक्तों, महान स्वतंत्रता सेनानियों , महापुरुषों और जानें मानें कवि कवित्रियों के पाठ तक पाठ्यक्रमों से हटा दिए। ऐसे में युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना व श्रेष्ठ साहित्य सृजन की भावना का विकास कैसे हो पायेगा। शिक्षा को राजनीति से अलग रखना होगा तभी विकसित व सशक्त भारत का नव निर्माण हो सकेगा.








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