राष्ट्रीय समाचार

कवि हृदय श्वेता माथुर की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन

सुनील कुमार माथुर

यह मानव जीवन परमात्मा का दिया हुआ अनोखा उपहार है । अतः जितना हो सके उतना इसे मानव कल्याण के लिए लगाईये । इस नश्वर संसार में आना – जाना तो लगा ही रहता हैं चूंकि हम तो उस परमात्मा की कठपुतलियां है वह जैसा नचाता है वैसा ही नाचना पडता हैं ‌ । इस संसार में आये ही है तो फिर ऐसा कार्य कीजिए कि हमारे जाने के बाद भी जनता हमें अपने नाम , पद , प्रतिष्ठा से नही अपितु हमारे व्यक्तित्व के कारण याद करे ।

२५ जनवरी २०२२ का दिन वह क्रूर दिन था जब एक कवि हृदय की नारी कवियत्री , कुशल गृहणी , मिलनसार , हंसमुख स्वभाव व व्यक्तित्व की धनी श्रीमती श्वेता माथुर पत्नी गौरव मदन माथुर इस नश्वर संसार को छोडकर परलोक सिधार गई । वे ४७ वर्ष की थी तथा कुछ समय से बीमार थी ।

स्व० श्वेता माथुर ने अपने जीवन काल को जिस मस्ती आनंद के साथ जिया वह अपने आप में आदर्श जीवन जीने की कला है । उसने अपने जीवन में एक – एक क्षण को सेवा के कार्य में लगाया और किसी जरुरतमंद की सेवा की तो उस सेवा का पता अपने दूसरें हाथ को भी नहीं लगने दिया । चूंकि माता श्रीमती मनोरमा माथुर व पिता ईजिनयर सुरेन्द्र कुमार माथुर व सेवाभावी परिवार में पली स्व० श्वेता माथुर को जन्म से ही आदर्श संस्कार मिले जिसे उसने अपने जीवन के अंतिम समय तक निभाया ।

स्व० श्वेता माथुर ने कभी भी किसी काम को छोटा या बड़ा नहीं समझा । बस करना हैं तो फिर हंसते हुए करो , रोते हुए क्यों करना । कवि हृदय की होने के कारण जब मन होता तब सुन्दर – सुन्दर कविता लिख डालती । उसे नृत्य – संगीत , पेंटिग , चित्रकला का भी बेहद शौक था । उसने स्कूली शिक्षा सै़ट पैक्टिक स्कूल से प्राप्त की तथा कॉलेज स्तर की शिक्षा जोधपुर पोलीटेक्निक कालेज से प्राप्त की ।

जो भी श्वेता के संपर्क में आया वह उसकी सादगी , स्नेहिल मुस्कान व आत्मीयता का कायल हो गया । उन्होंने धैर्य से लेखन को एक धार दी । ऐसी धार जिसमे मौलिकता और समर्पण एक होकर झिलमिलाते है । उसने शब्दो को इस तरह से पिरोया कि साहित्य जगत धन्य हो गया ।

आपकी सादगी , शालीनता , सहृदयता एवं सहिष्णुता वास्तव में हमें सतत् प्रेरित करती रहेगी । आपकी कार्यशैली , व्यवहार कुशलता , सकारात्मक सोच , दूरदर्शिता , समर्पण का भाव वंदनीय व सराहनीय था, उसका जीवन एक खुली किताब की तरह था । क्रोध से तो वह कोसो दूर थी । धर्म कर्म ही जीवन का मूल मंत्र था ।

वह तो सादा जीवन और उच्च विचारों की धनी थी । वे अपने पीछे दो पुत्रियां व भरा पूरा परिवार छोड गई है उसके निधन से साहित्य जगत व समाज सेवा के क्षेत्र में जो अपूर्णीय क्षति हुई है उसकी पूर्ति करना असंभव है। कायस्थ समाज के अनेक संगठनों , साहित्यकारो और समाज सेवियों ने स्व० श्वेता माथुर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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सुनील कुमार माथुर

लेखक एवं कवि

Address »
33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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