साहित्य लहर

हास्य-व्यंग रचना : चुनाव आ गये

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

चुनाव आ गये
नेताओं के बुरे दिन आ गये
रातों की नींद उड़ी
और दिन का चैन…
मोदी- माया के सुर बदले
योगी -अखिलेश रिझायें
सपने हंसी दिखायें
राहुल बाबा मौन

संजय निषाद पिए टानिक
मुकेश दिखाये टीवी पर दमखम
उधर केजरीवाल खांसते
और भी ऐरे गैरे दम भरते
दे -दे भाषण सांस फुलाते
दल बदलुओं की दाल गलेगी
सीट की खातिर नेताजी मदारी बन नाचेगा
आला कमान को खुश करने जोर लगाके गायेगा ।

कल तक जो,
महंगी -महंगी विदेशी गाड़ियों में हवा -हवाई होते थे
अब वे फांक रहे गली -गली में धूल
जनता पर वर्षा रहे स्वार्थ के फूल
पूड़ी-सब्जी खिला-खिलाकर वोट खरीदेंगे
भूखी-नंगी जनता को देकर धोखा
एक बार फिर नेताजी चुनाव जीतेंगे
नेता हंसेगा और जनता रोयेगी
फिर पांच साल बनवास भुगतेगी ।

चुनाव आ गये
सोच समझकर मतदान करना
जाति-धर्म के चक्कर में मत फंसना
नेता कोई ईमानदार चुनना
भाषण नहीं, दिल की आवाज सुनना ।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

लेखक एवं कवि

Address »
ग्राम रिहावली, डाकघर तारौली गुर्जर, फतेहाबाद, आगरा, (उत्तर प्रदेश) | मो : 9876777233

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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