साहित्य लहर

सदा अटल सर्वप्रिय अटल बिहारी वाजपेई जी

विधा : कुंडल छंद | 22 मात्रा | 12:10 पर यति | चार चरण | 2-2 चरण समतुकांत।

डॉक्टर धाराबल्लभ पांडेय ‘आलोक’

रचते रचना महान,
शब्द के पुजारी।
गढ़ते स्वच्छंद पंक्ति,
शुद्ध मन विचारी।।

कर्म-धर्म-मर्म ज्ञान,
शब्द सार भारी।
राष्ट्रप्रेम भाव हृदय,
शब्द अर्थ धारी।।

प्रखरवक्ता देशभक्त,
विमल हृदय धारी।
प्रेम पूर्ण शुद्ध भाव,
मन अटल बिहारी।।

महानेता प्रखर कवि,
सत्य वचन पालक।
जन-मन में बसे अटल,
राष्ट्र प्रजापालक।।

देश के प्रधान उच्च,
सर्वश्रेष्ठ सेवी।
दोष-खोटहीन कुशल,
प्रेम के मनस्वी।।

ज्ञानवान, शीलवंत,
गुणागार नेता।
मधुरिम वाणी, कविता,
सुशासन प्रणेता।।

सत्यवक्ता,सत्कर्म,
देशहित प्रणेता ।
सत्पालक, सच्चिंतक,
लोकमत विजेता।।

परमपुरुष, धीरमना,
महान व्रतधारी।
शत-शत प्रणाम तुमको,
हे अटल बिहारी।।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

Devbhoomi
From »

डॉ. धाराबल्लभ पांडेय ‘आलोक’

लेखक एवं कवि

Address »
अल्मोड़ा, उत्तराखंड | मो.नं : 9410700432

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Devbhoomi Samachar
Verified by MonsterInsights