साहित्य लहर

भाषणों से पेट नहीं भरता

डॉ एम डी सिंह
महाराजगंज गाजीपुर उत्तर प्रदेश

खाना तो रोटी ही होगा भाषणों से पेट नहीं भरता
बातों से मर सकता है मन किसी हाल पेट नहीं मरता

अभिनय से दृष्टि तृप्त होगी मन हुलसेगा तन सुलगेगा
कट सकती है रात अंधेरी पापी अधम पेट नहीं कटता

तप पूजा-पाठ और हवन में ताप तपस्या और तपन में
बन सकता है तन मन कुंदन तनिक भी ये पेट नहीं ढलता

मन की भूख ले जीना है पेट की भूख ना साथ निभाए
पल सकती हैं इच्छाएं जीवन भर कुछ दिन पेट नहीं पलता

भूख चबाते लोगों से जाके तो पूछिए पेट का हाल
क्या-क्या नहीं कर-कर हारे उनका फिर भी पेट नहीं चलता

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