विफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी | Devbhoomi Samachar

विफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी

हो सकता है कि वृक्ष का लाभ हमें न मिलें, लेकिन आने वाली पीढ़ी के लिए निसंदेह उपयोगी होगा। हरे भरे वृक्षों, बाग बगीचों व वनों के बिना यह जीवन आधा अधूरा है। चूंकि ये वृक्ष ही इस धरती के आभूषण है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं है अपितु हम सबका दायित्व है। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर (राजस्थान)

हर व्यक्ति प्रतिभावान होता है़, लेकिन उसे समय पर प्रोत्साहन नहीं मिलने से वह हताश एवं निराश हो जाता है और इसी हताशा के चलते उसके मन में हिलौरें ले रही रचनात्मक विचारधारा की श्रृंखला टूट जाती हैं और उसके मन में नकारात्मक विचार डेरा डाल बैठते हैं इसी के फलस्वरूप वह प्रगति की दौड में पिछड जाता हैं। जबकि हकीकत हमें यही सिखाती है कि विफलता ही विकास की पहली सीढ़ी है। अतः हताश व निराश न हो और जब भी मौका मिले तब खुलकर अपनी प्रतिभा को निखारने का प्रयास करें। जीवन में आगे बढने में बाधा डालने वाले अनेक लोग मिल जाएंगे लेकिन पीठ थपथपाने वाले कम ही मिलते हैं।

आज के दौर में नाटक देखकर अनेक लोग रो पडते हैं, लेकिन समाज की हकीकत को देखकर भी वे यही कहते है कि यह सब नाटक हैं। चूंकि वे सत्य से मुंह छिपाते हैं और सत्य को स्वीकार नहीं करते हैं जो जिंदगी की सबसे बडी भूल हैं। इसलिए जीवन में कभी भी डर कर कोई भी फैसला या निर्णय न लें।‌ याद रखिए अनिश्चितता, परिवर्तन व बाधाएं हमें हमेंशा मजबूत ही बनाते है, चूंकि ये हमें प्रगति की नई राह दिखाते हैं। जीवन में कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जिसमें किसी को कोई कठिनाइयों से न जुझना पड़ता हो।

हर व्यक्ति अपने आप में पूर्ण नहीं होता है लेकिन फिर भी हम हर किसी से कुछ न कुछ नया सिखते रहते हैं। याद रखिए कभी कभी छोटी-छोटी चीज़ें हमें बडी समस्याओं को सुलझाने में मदद करती है जिसके बारे में हमने कभी सोचा भी नहीं था। अतः कब कौन कहां काम आ जाए पता नहीं चलता। इसलिए जीवन में सभी से समान व्यवहार करे। आज का युवा पीढ़ी राष्ट्र की धरोहर हैं और संतुलित एवं संयमित जीवन ही युवाओं के लिए सफलता का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। इसलिए युवाशक्ति को उच्च शिक्षा प्रदान करने के साथ ही साथ उन्हें रचनात्मक कार्यों में लगाकर देश के विकास व उत्थान में उनका पूरा सहयोग लें।‌

विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए युवाओं को अपनी क्षमता से क्रियाशील रहकर आगे बढना होगा। भारत के सर्वांगीण विकास के लिए क्षमतावान, देशभक्त तथा चरित्रवान नागरिकों की आवश्यकता है। यह तभी सम्भव है जब बच्चों को बचपन से ही आदर्श संस्कार अपने घर से ही दें।  चूंकि आदर्श संस्कार कहीं बाजार में नहीं मिलते। इसी के साथ ही साथ पर्यावरण संरक्षण की ओर भी ध्यान रखना होगा। जब पर्यावरण संरक्षण होगा, तभी हम बीमारियों से बच पायेगे। वृक्षों का संरक्षण व संवर्ध्दन परोपकार का काम हैं।

हो सकता है कि वृक्ष का लाभ हमें न मिलें, लेकिन आने वाली पीढ़ी के लिए निसंदेह उपयोगी होगा। हरे भरे वृक्षों, बाग बगीचों व वनों के बिना यह जीवन आधा अधूरा है। चूंकि ये वृक्ष ही इस धरती के आभूषण है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं है अपितु हम सबका दायित्व है। हमारा देश भारत तो शक्ति व भक्ति के क्षेत्र में जाना जाता है और हरियाली के बिना जीवन सुरक्षित नहीं है। जहां आदर्श संस्कार है वहीं जीवन स्वर्गमय हैं। अतः सफलता प्राप्त करने के लिए हर समय कुछ न कुछ सिखते रहिए।


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