आपके विचार

श्रेष्ठ लेखन-श्रेष्ठ चिन्तन…

सुनील कुमार माथुर 



लेखन का जीवन में बडा ही महत्व है । अतः व्यक्ति को श्रेष्ठ लेखन के लिए श्रेष्ठ चिन्तन करते रहना चाहिए । श्रेष्ठ लेखन व श्रेष्ठ चिन्तन तभी होगा जब हमारी सोच सकारात्मक हो । कोई भी लेखन कार्य आरंभ करने से पूर्व विषय का चयन किया जाना आवश्यक है । आप जिस विषय पर लेखन करना चाहतें है उस विषय पर जनता-जनार्दन के विचार सुने उन्हें समझें और उन पर चिन्तन मनन करे फिर विचारों में क्रमबध्दता लाकर शांत चित होकर अपना लेखन कर्म करें ।

फिर देखिये किस तरह से आपकी लेखनी धडल्ले से चलती हैं और आपकों पता भी नहीं चलेगा कि कब लेख पूरा हो गया । श्रेष्ठ लेखन के लिए श्रेष्ठ लेखकों की पुस्तकों को पढें । उनकी भाषा शैली देखें । अर्थात खूब पढे , खूब चिंतन करें । जब आपका लिखने का मन न हो तो उस वक्त मन में आयें श्रेष्ठ विचारों को अपनी डायरी में नोट कर ले । खाली समय में उन पर चिन्तन मनन करे व अपने साहित्यकार मित्रों के साथ गहन चर्चा करें ।

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इससे आपको नई – नई बातों व तथ्यों की जानकारी मिलेगी इसी के साथ ही साथ कभ बोलें और अधिक सुनें – समझें । तभी आप सही और सटीक लेखन कर पायेंगे । लेखन भी अन्य कलाओं की तरह एक कला हैं । आप नियमित लेखन करके अपने ज्ञान को बढा सकते हैं । पहलें छोटे – छोटे लेख व कविताएं लिखें फिर धीरे – धीरे बढाते रहिए ।



जब आप अपनी रचना को प्रकाशन के लिए भेजे तब एक बार उसे पुनः पढ ले ताकि अशुद्धियों से बचा जा सकें । आप अपने प्रयासों से एक अच्छे लेखक , कवि , व्यंग्यकार बन सकते हैं और समाज में अपनी एक अलग पहचान बना सकतें है । आपके श्रेष्ठ लेखन से समाज को भी लाभ मिलता हैं । पढनें वालों की नकारात्मक सोच कम होती हैं और सकारात्मक सोच बढती हैं । भाषा का ज्ञान बढता हैं । नयें नये शब्दों से परिचय होता हैं । सोचने विचारने की शक्ति बढती हैं ।



इतना ही नहीं सकारात्मक सोच के कारण मन शांत और प्रसन्न चित रहता हैं । उनके व्यक्तित्व में निखार आता हैं । सही मार्गदर्शन मिलता है । लेखन के लिए विषय की कोई कमी नहीं है । जब आप नियमित रूप से लेखन करने लग जाओगे तो विषय स्वतः आपके सामने आ जायेगे और उस वक्त आपको ऐसा लगेगा कि विषय अनेक हैं लेकिन लिखने के लिए समय नहीं है या समय है तो वह कम पड रहा हैं ।



वैसे आप शिक्षा जगत , बाल जगत , महिला जगत , तीज – त्योहार व राष्ट्रीय पर्व एवं दिवस पर तथा भारतीय सभ्यता और संस्कृति पर अच्छे आलेख लिखकर श्रेष्ठ लेखन की शुरुआत कर सकतें है । लेखन एक श्रेष्ठ कर्म हैं और पाठकों की प्रतिक्रिया ही आपका श्रेष्ठ पारिश्रमिक हैं चूंकि पाठकों की प्रतिक्रिया से ही हमारी लेखनी में निखार आता हैं ।

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