पर्यटन

यात्रा वृत्तांत : झीलों की नगरी उदयपुर

यात्रा वृत्तांत : झीलों की नगरी उदयपुर, डॉ. रिखब जी का सफर जयपुर तक था और मेरा आगरा तक। 11 सितंबर सुबह 10:00 बजे आगरा कैंट यानी कि अपने गृह जनपद में मेरे कदम पड़ चुके थे। #मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, फतेहाबाद (आगरा)

राजस्थान राज्य का जिला उदयपुर एक बहुत ही खूबसूरत शहर है। यह शहर एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। इसकी संस्कृति व इतिहास बेमिसाल है। यहां की भाषा हिंदी व मेवाड़ी है। उदयपुर का प्रारंभिक इतिहास सिसोदिया राजवंश से जुड़ा हुआ है। उदयपुर को झीलों के शहर के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि सुंदर झीलों से घिरा हुआ है।

पिछोला झील ऐतिहासिक है। सिटी पैलेस प्रसिद्ध व शानदार है। इसके साथ ही जग निवास द्वीप, जग मंदिर, शिल्प ग्राम, सज्जनगढ़, फतेहसागर, मोती मगरी, बाहुबली हिल्स, एकलिंग जी मंदिर, सहेलियों की बाड़ी आदि प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल हैं । उदयपुर को महाराज उदय सिंह ने 1559 ईस्वी में स्थापित किया था। इसे पूर्व का वेनिस और भारत का दूसरा कश्मीर माना जाता है।

खूबसूरत वादियों से घिरा यह शहर सूर्योदय का शहर कहा जाता है। उदयपुर शहर की यात्रा का सौभाग्य मुझे 8 सितंबर 2023 को मिला। उदयपुर शहर की मेरी यह पहली यात्रा थी और इस यात्रा का श्रेय जाता है डॉ. नरेश कुमार सिहाग एडवोकेट व डॉ. विकास शर्मा जी को। आगरा छावनी से शाम को मेरी यात्रा प्रारंभ हुई।

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भारतीय रेल की रेलमपेल व्यवस्था का आनंद लेते हुए सुबह सूर्य भगवान के प्रकट होने से ठीक पहले दिनांक 9 सितंबर को मैं उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर अपने कदम रख चुका था। ऑटो रिक्शा व सिटी बस द्वारा अपने गंतव्य तक पहुंच गया। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के द्वार पर डॉ. नरेश जी मुझे मेरा इंतजार करते हुए मिले। उनके साथ विश्राम स्थल पहुंचा। दैनिक क्रियाकर्मों से फ्री हुआ। कुछ विश्राम किया तब तक डॉ. सिहाग जी व डॉ. शर्मा जी नहाधोकर तैयार हो गए।

शर्मा जी कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने में व्यस्त थे तब तक मैं व डॉ. सिहाग जी घूमने बाहर निकल गये। हमने स्वादिष्ट पोहा का लुफ्त उठाया। घूमघाम कर पुनः अपने कमरे में आ गये। कुछ समय बाद हम तीनों महाशय निकल पड़े ऑनलाइन व ऑफलाइन सेमिनार आयोजन स्थल की तरफ। शर्मा जी ने कार्यक्रम की तैयारी के संबंध में जानकारी जुटाई, सब कुछ ठीक था। मैं व डॉ. सिहाग जी विद्यापीठ के हरे भरे व सुंदर परिसर में घूमने निकल गये। ऊंचे -ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित राजस्थान विद्यापीठ काफी खूबसूरत है।



सारा दिन कार्यक्रम चलता रहा। शाम को खाना खाकर मैं व डॉ . सिहाग जी निकल गये घूमने। रास्ते में ठंडी आइस्क्रीम का लुफ्त उठाया। डॉ. शर्मा जी ने फोन किया और हम अपने रैन-बसेरे की तरफ लौट आये। रात को नींद बहुत गहरी आई। सुबह कब हो गई पता ही नहीं चला। हम फटाफट तैयार हुए, नाश्ता किया और निकल पड़े विद्यापीठ के विशाल सभागार की ओर रंगारंग कार्यक्रम का शुभारंभ हो चुका था।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने व अन्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को खूब बांधे रखा। शाम तक कार्यक्रम चलता रहा। रात को मुझे वापिस घर लौटना था। कमरे पर आये जाने की तैयारियां की। डॉ. रिखब जी की गाड़ी व मेरी एक ही थी, सो हम दोनों ने साथ-साथ निकलने का प्लान बनाया। डॉ. सिहाग व डॉ. शर्मा जी ने दूसरे दिन सुबह निकलने का प्लान बनाया। हमें वे विद्यापीठ के गेट तक छोड़ने आये। सड़कों पर भारी जाम था।



ऑटो रिक्शा नहीं मिला, मैं व डॉ. रिखब जी कुछ दूर पैदल ही चले। कुछ देर बाद एक ऑटो रिक्शा मिल गया। रेलवे स्टेशन पर हम एक घंटा पहले पहुंच गये। डॉ. रिखब जी ने पानी वाले बताशों का आर्डर किया और हमने पांच तरह का अलग-अलग स्वाद चखा। डॉ. रिखब जी का सफर जयपुर तक था और मेरा आगरा तक। 11 सितंबर सुबह 10:00 बजे आगरा कैंट यानी कि अपने गृह जनपद में मेरे कदम पड़ चुके थे।


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यात्रा वृत्तांत : झीलों की नगरी उदयपुर, डॉ. रिखब जी का सफर जयपुर तक था और मेरा आगरा तक। 11 सितंबर सुबह 10:00 बजे आगरा कैंट यानी कि अपने गृह जनपद में मेरे कदम पड़ चुके थे। #मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, फतेहाबाद (आगरा)

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