साहित्य लहर

चुनावी हलचल पर कुमाउनी रचना : को बणौल विधायक

भुवन बिष्ट

चुनावी हलचल हैरै ,आब द्वी हजार बाईस,
क्वें रैं जाल चाईयै कैंक हैजाल पूरिं ख्वाईस।
रैलियोंक भरमार वादोंक जगै दिणीं मुछयाव,
सोसल मिडिया में मारण रयीं सब उच्छयाव।।
क्वें जोड़न लागि रयीं हाथ लगांण रिं धात,
सबैं कुंण लाग रयीं हांम तुमौर छन साथ।
गौनूंक लै बढ़ी गो आजकल खूब मान,
नेताज्यू चाण फैगी आब दयाप्तों थान।
गौनूँक बाखई ,बजार, माल धारकिं दुकान,
सबैं जाग आब एकैं चर्चा हैरै।
सबैं ठुल नेता छन, को छू जनता लायक।
को बणौल विधायक……

को बणौल विधायक।।

हामौर टिकट पक्क सबूंकैं छन विश्वास,
विधायक बनणौक लगै रैं बरसों बै आश।
बेरोजगारी मंहगाई सबै हटाई जाल,
विकासक गंग गौं गौं में बगाई जाल।
मुफ्त मुफ्तक लैं स्वैंणा तुमुकैं दिखाई जाल,
चुनावी बखत गुण ज्ञान सब सिखाई जाल।
भौत नेताज्यू इथां उथां हूंण लै देखी जाल,
सबूंक आपण राजनीति रवाट लै सेंकि जाल।
गजुना गजुन हैरै, आब को बणौल नायक।
सबैं जाग आब एकैं चर्चा हैरै।
को बणौल विधायक……

को बणौल विधायक।।

वाल बाखईक पाल बाखईक नेताज्यकू लाईन छन,
सबैं कूंण लागिं रयीं हामांर नेताज्यू फाईन छन।
जनसेवक बणीं सब लगाण रयीं आपण कैमस्ट्री,
क्वें बणीं जाल विधायक क्वें हैजाल फिर हिस्ट्री।
जतुकै नेताज्यू छन सबूंक दगाड़ उतुकैं भीड़ छन,
कुर्सी पाणक जुगत में आपण आपण क्वीड़ छन।
आपण बढ़ाई दौहर बुराई गिच गिचै मसमसाट छन,
इथां लै भीड़ उथां लै भीड़ खाण पिणौक जो ठाठ छन।
सराद त्यार कौतिक होई दिवाई रंग गयीं चुनावी रंग में,
जनताक नौक भौल काम काज में नेताज्यू हैंगी संग में।
वोटर भौत जरूरी छन कुर्सीक वीं तो छन सुखदायक।
सबैं जाग आब एकैं चर्चा हैरै।
को बणौल विधायक……

को बणौल विधायक।।

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