आपके विचार

जब अपने ही पराये बन गये

सुनील कुमार माथुर

मित्र एक ऐसा साथी होता हैं कि हम उसे अपने मन की हर बात बताकर अपने दिल की हर पीडा को काफी हद तक कम कर लेते हैं और हमारा मन हल्का हो जाता हैं । यहीं वजह है कि मित्र की अहमियत लोग अपने परिवार वालों से भी अधिक महसूस करते हैं चूंकि जो बात हम अपने परिवार वालों से नहीं कह सकतें है वहीं बात मित्र को बिना भय के धडल्ले से कह देते हैं । यहीं वजह है कि मित्रों के बीच दोस्ती मजबूत होती हैं । अगर दोस्ती काफी पुरानी हैं तो और भी अच्छी बात हैं क्योंकि जैसे शहद जितना पुराना होता हैं उतना ही अच्छा माना जाता हैं ठीक उसी मित्रता जितनी पुरानी होती हैं उतनी ही अच्छी होगी हैं ।

अंहकार किसी का भला नहीं करता हैं…

लेकिन आज का इंसान अपने स्वार्थ में इतना अंधा हो गया हैं कि आप उसके सौ काम कर दो लेकिन किसी कारण से एक काम नहीं कर पायें तो वह उसे जिन्दगी भर गिनाता हैं । नाराज हो जाता हैं और अपने वर्षों पुराने संबंधों को एक झटके में तोड डालता हैं और इसे अपनी बहादुरी समझता हैं वह यह भूल जाता हैं कि मित्र की भी कोई मजबूरी रही होगी जिसके कारण कार्य समय पर नहीं हो पाया।अंहकार के चलते वह अच्छा – बुरा सब भूल जाता हैं । अंहकार किसी का भला नहीं करता हैं । रावण काफी विद्वान् था लेकिन अंहकार के कारण उसका पतन हुआ।

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आज का इंसान इतना स्वार्थी हो गया हैं कि वह कदम-कदम पर अपना स्वार्थ ही देखता हैं उसे दूसरों की पीडा व परेशानी से कोई मतलब नहीं है। जब हमें परमात्मा ने यह मानव जीवन दिया है तो प्रेम व स्नेह के साथ जीवन जीओं । आप दूसरों से जैसा व्यवहार चाहते हो वैसा ही व्यवहार आप दूसरों के साथ कीजिए । केवल अपना ही लाभ न देखें । ताली दोनों हाथों से बजती हैं तो फिर आप एक तरफा व्यवहार क्यों कर रहें है । हम समाज को बदल नहीं सकतें । हमें ही समय के अनुसार ढलना होगा समाज स्वतः ही सुधर जायेगा ।

हमारे बडे बुजुर्गों का कहना हैं कि कि कभी जिन्दगी के धागे टूट जायें तो दोस्तों के पास जाना चूंकि दोस्त हौसलों के दर्जी होते हैं और वे मुफ्त में रफू कर देते हैं । कोई भी रिश्ता व दोस्ती दिल से होनी चाहिए शब्दों से नहीं , नाराजगी शब्दों से होनी चाहिए दिल से नहीं । सडक कितनी भी साफ हो धूल तो हो ही जाती हैं , इंसान कितना भी अच्छा हो भूल तो हो ही जाती हैं।

आप दूसरों से जैसा व्यवहार चाहते हो, वैसा ही व्यवहार आप दूसरों के साथ कीजिए…

पर्वत से सीखों गर्व से शीश झुकाना , सागर से सीखो जी भर कर लहराना , प्रकृति नहीं सिखाती किसी को ठुकराना , इसे आता हैं बस सबको अपनाना। हमारे संतों व महापुरुषों का कहना हैं कि सच्चा स्नेह करने वाला आपकों केवल बुरा बोल सकता हैं लेकिन आपका कभी भी बुरा नहीं कर सकता क्योकि उसकी नाराजगी में आपकी फिकर और दिल में आपके प्रति सच्चा स्नेह होता हैं वक्त और हालात बदलते रहते हैं लेकिन अच्छे रिश्ते और सच्चे दोस्त कभी नहीं बदलते ।

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