साहित्य लहर

कविता : चांद पर तिरंगा

कविता : चांद पर तिरंगा, वो पल था जब हम थे साइकिल के सहारे, अब तो हमने दुनियां की छक्के छुड़ा दी।। आज सीखने की जरूरत है आन पडी उनको, जिनको असफलता ने मंजिल से दूरी बना दी।। #आशुतोष, पटना (बिहार)

भारत की ताकत आज देख रही दुनियां
मेहनत से हमने चांद पर तिरंगा फहरा दी।।

नाज था जिनको वो है पलकें बिछाये
दुनिया से दुनिया को हमने परिचय करा दी।।

वो पल था जब हम थे साइकिल के सहारे
अब तो हमने दुनियां की छक्के छुड़ा दी।।

आज सीखने की जरूरत है आन पडी उनको
जिनको असफलता ने मंजिल से दूरी बना दी।।


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कविता : चांद पर तिरंगा, वो पल था जब हम थे साइकिल के सहारे, अब तो हमने दुनियां की छक्के छुड़ा दी।। आज सीखने की जरूरत है आन पडी उनको, जिनको असफलता ने मंजिल से दूरी बना दी।। #आशुतोष, पटना (बिहार)

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