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कर्म ही पूजा, कर्म ही शक्ति

कर्म ही पूजा, कर्म ही शक्ति, अपना कार्य पूरी ईमानदारी और निष्ठा और कर्तव्यपरायणता के साथ कीजिये व तमाम प्रकार के टेंशनों से मुक्त रहिएं। धर्म कर्म में रूचि लें व जीवन को… जोधपुर (राजस्थान) से सुनील कुमार माथुर की कलम से…

आज का इंसान दिन रात धन के पीछे दौड रहा हैं। यहां तक की धन पाने के लिए वह अनैतिक कार्य तक कर रहा हैं। वह धन को ही माई बाप मान बैठा है। धन कि शिक्षा और धर्म कि शिक्षा दोनों अलग अलग है। लेकिन आज का इंसान केवल धन कमाने की ही शिक्षा ग्रहण कर रहा है। धर्म की शिक्षा से वह दूर भाग रहा हैं। यही वजह हैं कि आज इंसान संस्कारहीन बना हुआ हैं न कि संस्कारवान। उसे तो बस येन केन प्रकारेण धन ही चाहिए। आज संस्कारों की शिक्षा न तो शिक्षण संस्थानों में दी जा रही हैं और न ही घर परिवार में। आखिर कौन युवापीढ़ी को आदर्श संस्कार देगा।

आज देश में अधिकांश कार्य हमारी सभ्यता और संस्कृति के विपरित हो रहे हैं। यहां तक की पाश्चातय संस्कृति के रंग में रंग कर हम हमारा खानपान, रहन सहन, पहनावा तक भूल गये हैं। शरीर से धीरे धीरे कपडा तक घटता जा रहा है। हमारी सभ्यता और संस्कृति तो हमें ऐसा नहीं सिखाती हैं। आज की शिक्षण संस्थानों में केवल किताबी ज्ञान ही दिया जा रहा है न कि व्यवहारिक ज्ञान। यही वजह हैं कि इंसान धन के पीछे दौड रहा है और बावला हो रहा हैं।

नतीजन यह आपराधिक मामले बढ रहे हैं। चूंकि इंसान के पास धन तो परचूर मात्रा में है, लेकिन व्यक्ति में धर्म व आदर्श संस्कारों का नितांत अभाव हैं ईश्वर ने हमें इतना सुंदर जीवन उपहार स्वरूप दिया हैं फिर भी हमने इसे बिगाड दिया हैं। धर्म कर्म से दूर भाग रहे हैं और नाना प्रकार के क्रीम पाउडर व अन्य सौन्दर्य सामग्री का इस्तेमाल कर इसे बिगाड रहे हैं। आज का हर इंसान टेंशन और तनाव के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहा है।

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अपना कार्य पूरी ईमानदारी और निष्ठा और कर्तव्यपरायणता के साथ कीजिये व तमाम प्रकार के टेंशनों से मुक्त रहिएं। धर्म कर्म में रूचि लें व जीवन को बोझ समझ कर न जीएं अपितु आनंद के साथ जीवन व्यतीत करें। जब तक यह शरीर हैं तब तक ईश्वर के नाम का स्मरण कीजिये। जब हम सभी अन्य दैनिक कार्य रोज बिना बाधा के कर रहें तो फिर ईश्वर के नाम के स्मरण में आनाकानी क्यों। अंहकार का चोला उतार फेंकिए और धर्म कर्म में ध्यान दीजिये। चूंकि कर्म ही पूजा हैं, कर्म ही शक्ति है, कर्म ही श्रध्दा हैं और कर्म ही भक्ति है।

अंहकार को छोडकर विनम्रता के साथ जीवन व्यतीत करें। जीवन के अनुभव कभी भी बेकार नहीं जाते हैं वे सदैव समाज के काम आते है। कोई भी क्रीम काले आदमी को गोरा नहीं कर सकता लेकिन सच्चाई, ईमानदारी, संयम, धैर्य, सहनशीलता, प्रेम, दया, करूणा, ममता, वात्सल्य अंहकार का विनाश कर व्यक्ति को सच्चा व नेक इंसान जरूर बना सकते हैं।

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कर्म ही पूजा, कर्म ही शक्ति, अपना कार्य पूरी ईमानदारी और निष्ठा और कर्तव्यपरायणता के साथ कीजिये व तमाम प्रकार के टेंशनों से मुक्त रहिएं। धर्म कर्म में रूचि लें व जीवन को... जोधपुर (राजस्थान) से सुनील कुमार माथुर की कलम से...

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