साहित्य लहर

कविता : लंबी-लंबी बातें

आशुतोष

लंबे संघर्ष के बाद, सत्ता में आए हैं हम l
सिर्फ दो सांसद से, तीन सौ बनाए है हमll

चौदह से बाईस तक, धरती से आकाश तक
पगडंडियो से गांव तक, रास्ते साफ बनाए है हम।।

फूट पाथ पर सोते लोग, भूखे प्यासे भटकते लोग
फ्री आवास,भोजन,दवाई, नेट व्यवस्था लाए है हम।

घोटालेबाज भ्रष्टाचारी काला धन, का कठोर कानून
बीस चौदह में पहली कैबिनेट, से लेकर आए है हम

गरीबो के फंड के पैसे, रास्ते में लूट लिए जाते थे
डिजिटल के जरिये घर घर, पहुंचा रहे है हम।।

मेक इन इंडिया के माध्यम से, मुनाफा दर मुनाफा
रक्षा कवच के लिए विश्व से, लोहा मनवा रहे है हम।।

फसल बीमा, किसान समृद्धि, योजना के द्वारा
किसान और भंडारण क्षमता, बढा रहे है हम।।

विदेशी निवेश के बदौलत, विदेशी मुद्रा और निवेश
सिर्फ और सिर्फ रोजगार,के लिए बढा रहे है हम।।

धारा तीन सौ सत्तर, तीन तालाक जैसे कुप्रथा
समाजिक समरसता के लिए, लेकर आए है हम।।

शताब्दी पूर्व लंबित कई, मसला सुलझाए है हम
राम मंदिर काशी से ज्ञानवापी,तक का लाए है हम।

देश के वीर सैनिको के लिए, वन रैक वन पेंशन
आधुनिक हथियार और बुलेट प्रूफ, पोशाक लाए है हम।।

धरती से चांद तक समंदर, से आसमा तक
सिर्फ और सिर्फ भगवा लहरा रहे है हम।।

आओ सीखे कवि आशुतोष, से लंबी पारी खेलने का राज
चाल,चरित्र, लोभ, आराम, त्याग, फिर देखो त्याग।

जवानी गुजरी झोपडी में, ग्यारह जन रहते साथ
आयो धन दोनो हाथ समटे, बुढापा गुजरी हवालात।

सब जानते है आपके, धन दौलत का इतिहास
बिल्ली चली वैष्णव बनने, चहुंओर उड़े उपहास।।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

Devbhoomi
From »

आशुतोष, लेखक

पटना, बिहार

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Devbhoomi Samachar
Verified by MonsterInsights