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आजादी के अमर शहीदों को हमारा सलाम

सुनील कुमार माथुर

हमारा देश 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजी दासता से मुक्त हुआ । चौदह अगस्त की रात्रि को सोये थे तब गुलामी की जंजीरों में जकडे थे लेकिन पन्द्रह अगस्त 1947 को सवेरे उठे तब आजाद भारत में आजादी की सांस ली । हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद रखना होगा । उन्होंने अंग्रेजों को इस देश से मार भगाया । वे भले ही शहीद हो गये मगर भारत माता को अंग्रेजी दासता से मुक्त कराकर ही दम लिया ।

हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का त्याग व बलिदान कभी भी बेकार नहीं जायेंगा । भारत माता के वीर सपूतों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है । देश की सेवा में उनके इस महान बलिदान के लिए समूचा राष्ट्र उन्हें नमन करता है । देश के इन अमर नायकों का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जायेंगा । चाहे स्थिति कुछ भी हो भारत पूरी दृढता से हर चुनौती से निपटने के लिए हर वक्त तैयार है । भारत माता के वीर सपूत देश के स्वाभिमान की रक्षा करेगा । हमारे जवानों ने अपना फर्ज निभाते हुए अपनी जान तक दे दी । देश उनके इस बलिदान को कभी भी नहीं भूल पायेगा । बहादुर सैनिकों को खोने का दर्द शब्दों में बया नहीं किया जा सकता । राष्ट्र अमर नायकों को सलाम करता है जिन्होंने भारत माता को सुरक्षित रखते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी ।

भारत को जब – जब किसी ने चुनौती दी या ललकारा तो हमारे वीर जवानों ने उन्हें ऐसा सबक सिखाया कि उन्होंने फिर कभी भारत की ओर आंख उठाकर नहीं देखा । अतः देश की युवापीढ़ी को देश की स्वतंत्रता के मूल्यों को पहचानकर उनकी रक्षा के लिए सदा तत्पर रहना चाहिए और आजादी के लाभों को जन – जन तक पहुंचाने का कार्य मुस्तैदी से करना चाहिए ।

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हमारे देश की आजादी प्राप्त करने का लक्ष्य जितना पवित्र , कठिन और आवश्यक था उतना ही राष्ट्र की स्वतंत्रता की रक्षा करना और उसके लाभों को जन जन तक पहुंचाने की आज सबसे बडी जरूरत है । इसके लिए युवा व भावी पीढी को समर्पण की भावना से कार्य करना होगा । स्वतंत्रता सेनानियों व आम लोगों की कुर्बानियों , त्याग और संघर्ष के बाद हमें आजादी मिली है । इसके लिए देश ने बहुत बडी कीमत चुकाई है ।

देश की स्वतंत्रता के लिए सेनानियों के त्याग व बलिदान के बारे में युवापीढ़ी को जानकारी देना बहुत जरूरी है । यह कार्य उन लोगों को विशेष रूप से करना चाहिए जिन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लिया । यह कार्य आज बहुत जरूरी हो गया है ।

हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का त्याग व बलिदान हमारे देश के लोगों को हमेशा देश की आजादी की रक्षा एवं राष्टीय पुनर्निर्माण के संकल्प की याद दिलाता रहेगा । हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी के साथ ही साथ सामन्तशाही के विरूद्ध भी आन्दोलन चला और किसानों को संगठित करने का महत्व पूर्ण कार्य किया ।

खुली जेल तथा डाकुओं को शिक्षित करने का कार्य किया । इसके साथ ही साथ चिकित्सालय , महाविद्यालय , पोलीटेक्नीक , नारी शिक्षा , इलेक्ट्रानिक और कम्प्यूटर आदि शिक्षा की व्यवस्था करने में भी वे हमेशा आगें रहें । वे भारतीय संस्कृति की रक्षा करने के प्रबल हामी थे । जिन आदर्शों के लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने जीवन भर संघर्ष किया उनके जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए । हमारे स्वतंत्रता सेनानी वैचारिक स्तर पर शांति व अहिंसा के पुजारी , बुद्धिजीवी, साहित्यकार , पत्रकार एवं सच्चे समाजसेवी और कुशल राजनीतिज्ञ थे ।

उन्होंने देश की आजादी के लिए न केवल संघर्ष किया और पीडा ही भोगी बल्कि आजादी के बाद गरीबी , बेकारी को मिटाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से उनके आर्थिक , सामाजिक उत्थान एवं रोजगार देने का सुनियोजित प्रयास किया । उनका विराट व्यक्तित्व आज प्रेरणादायक है और युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए ।

स्वतंत्रता दिवस केवल आजादी के नाम पर छुट्टी मनाने का दिन ही नहीं है अपितु यह हमें करूणा , ममता , स्नेह , भाईचारा , वात्सल्य , ईमानदारी , सत्यम् शिवम् सुन्दरम् का भी पाठ पढाता हैं । अतः आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा पीढी स्वंतंत्रता सेनानियों के त्याग व बलिदान को अपने जीवन में आत्मसात करें व केन्द्र व राज्य सरकारें अपने अपने यहां पाठ्यक्रमों में स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग व बलिदान से संबंधित पाठ बच्चों को स्कूलों में आरम्भ से ही पढाये व इसे पाठ्यक्रम में सम्मिलित करें ।

आज स्वतंत्रता दिवस का पर्व मनाते हुए हमें उन स्वतंत्रता सेनानियों को याद करना चाहिए जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर ये सुनिश्चित किया कि हम सर उठाकर जी सकें हमें यह भी याद रखना चाहिए कि आज जब हम पन्द्रह अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की खुशियां मना रहें है तब हमारी सीमाओं की रक्षा कौन कर रहें है । हम वीर जवानों का बलिदान कभी नहीं भूलेगे ।

आजादी का तात्पर्य यह नहीं है कि हम अपनी मनमानी करें । लोगों ने आजादी का अर्थ अपनी मनमानी से लगा लिया हैं और यही वजह हैं कि आज देश में चंद लोग ऐसे हैं जो अपने स्वार्थ की खातिर देश की युवापीढ़ी को गुमराह कर रहें है और राष्ट्र विरोधी कार्य करा रहें है जो देशहित में नहीं हैं । हमारे संत महात्मा व साधु संत बराबर अपने प्रवचनों में युवाओं को आव्हान कर रहें है कि वे अनैतिक कृत्य नहीं करे और न ही किसी के बहकावे में आयें अपितु अपनी शक्ति को राष्ट्र के विकास और उत्थान में लगाये और एक नये भारत का नव निर्माण करें ।

आज आवश्यकता इस बात की हैं कि युवापीढ़ी आत्मविश्वास के साथ आगें बढें और स्वंय भी प्रगतिशील विचारों के बनें और दूसरों को भी प्रगति की राह दिखाये । शिक्षण संस्थानों में हम मात्र किताबी ज्ञान ही अर्जित कर पाते हैं और किताबी ज्ञान की ही परीक्षा देते हैं जबकि व्यवहारिक ज्ञान हमें समाज में मिलता हैं ।

व्यवहार में पहले हमारी परीक्षा कदम – कदम पर होती हैं और फिर हमें सीख मिलती हैं यानि ठोकर खाने के बाद ही हमें अच्छे – बुरे का ज्ञान हो पाता हैं । अतः जीवन में कभी भी किसी का बुरा न करें व अमर शहीदों के त्याग व बलिदान को जीवन में अंगीकार करके आगे बढें । समाज व राष्ट्र हित की सोचे और उसी के अनुरूप कार्य करें । राष्ट्र विरोधी ताकतों का कभी भी सहयोग न करे और न ही उन्हें शरण दे आपका तनिक सा सहयोग ही राष्ट्र की सुरक्षा में मील का पत्थर साबित हो सकता है ।

आज हमें यह प्रतिज्ञा ले कि एक ऐसे भारत का नव निर्माण करे जो अपने इन शूरवीरों के बलिदान को सार्थक करें चूंकि हमें अपने वीर शहीदों के सपनों का भारत बनाना है।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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सुनील कुमार माथुर

लेखक एवं कवि

Address »
33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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